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अध्य़क्ष का संदेश

संत ऑगस्टीन का कथन है “बुरे कार्यों की स्वीकारोक्ति अच्छे कार्यों की शुरूआत हैं। समझौता की अवधारणा इसी विचार पर आधारित है। आयकर समझौता आयोग एक स्व - नियामक प्राधिकरण है,  जिसकी स्थापना न्यायमूर्ति वानचू समिति (1971) की अनुशंसाओं के आधार पर संविधि द्वारा की गई थी। यह 01-04-1976 से प्रभावी बना।

इस  आयोग की स्थापना का मुख्य उद्देश्य वादों के समझौते को एक सांविधिक आधार प्रदान करना था। इसकी स्थापना मुकदमे के स्थान पर मध्यस्थता के न्यायाधिकरण के रूप में की गई थी। इसका प्रयोजन विरोधी पक्षों को एक सहमति की ओर अग्रसर करना है न कि न्याय के सामान्य प्रशासन में निहित लम्बे समय तक चलने वाली प्रक्रिया के अधीन करना । इसी प्रकार का तंत्र युनाईडेट किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका , ऑस्ट्रेलिया तथा फ्रांस में भी मौजूद है।

आयोग ने इस निमित्त अत्यंत प्रभावकारी सेवा प्रदान की है जिसे न्यायमूर्ति डुग्गल समिति, जिसने 1996 में आयोग के कार्यों की समीक्षा की थी, ने सराहा है।
हाल के संशोधनों ने “तलाशी और अभिग्रहण”  के  मामलों से संबंधित विवादों  को समझौते के लिए संचालित करने की दुर्वह जिम्मेदारी दोबारा से आयोग को सौंप दी है। परिणामस्वरूप नए वादों की संख्या वर्तमान समय में बढ़ गई हैं।

नए वादों के संबंध में समझौता प्रक्रिया को पूर्ण करने की अधिकतम समय सीमा 18 महीने तय की गई है।

त्वरित एवं समयबद्ध समझौते को संभव बनाने के लिए तकनीकी का भी प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। आयकर समझौता आयोग की वेबसाइट का प्रयोजन आम जनता को विद्यमान समझौता तंत्र के बारे में जागरूक बनाने के लिए एक उपयोगी सहायक बनना है। आयकर समझौता आयोग की प्रक्रिया के विषय में वेबसाइट विस्तृत जानकारी प्रदान करता है। यदि करदाता पूर्व में स्पष्टवादी नहीं रहे हैं तो उनकी  ओर से उदार एवं स्पष्टवादी सहयोग आवश्यक है।

यह आयोग वर्तमान एवं इच्छुक आवेदकों के लिए एक गत्यात्मक मंच बनने की ओर क्रमशः अग्रसर है । मैं उपयोगकर्ताओं से आग्रह करुगा की वे वेबसाइट के लगातार उन्नयन के लिए अपने मूल्यवान सुझाव प्रदान करें ताकि वेबसाइट को अधिक प्रभावकारी बनाया जा सके ।
प्रतिपुष्टियां वेब प्रबंधक श्री सरबजीत सिंह,  भा.रा.से., अतिरिक्त निदेशक जाँच (अन्वेषण) दिल्ली को web-itsc@nic.in पर भेजी जा सकती है।