अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. कर विवाद के संदर्भ में समझौता से क्या अभिप्राय है ? यह अपील की प्रणाली से किस प्रकार भिन्न है ?

आयकर एवं धन कर के संदर्भ में विवादों का समझौता वैकल्पिक विवाद समाधान के उद्देश्य पर आधारित है। इसकी प्रकृति मध्यस्थता अथवा विवाचन की है। आयकर समझौता आयोग द्वारा पारित समझौता आदेश अंतिम एवं निर्णायक प्रकृति के होते है।

समझौता के लिए आवेदन केवल कर निर्धारण की कार्यवाही के लंबित रहने के दौरान की जा सकती है, जबकि अपील, केवल कर निर्धारण कार्यवाही के समाप्त हो जाने के पश्चात निर्धारण आदेश के विरूद्ध की जा सकती है। समझौता आयोग में आने के लिए आवेदक को ऐसी आय प्रकट करना जरूरी है जो उसने आयकर विभाग के समक्ष नहीं किया है एवं समझौता आवेदन फाईल करने से पूर्व प्रकट की गई आय पर देय कर एवं ब्याज अदा करना भी जरूरी है। अपील फाईल करने के लिए ऐसी कोई शर्त लागू नहीं है।

समझौता के लिए प्राप्त आवेदन को सांविधिक रूप से 18 महीने के भीतर निस्तारित  किया जाना जरूरी है ऐसा नहीं होने पर केस वापस संबंधित आयकर प्राधिकारी को भेज दी जाती है। अपील के निपटारे के लिए ऐसी कोई सांविधिक समय सीमा नहीं हैं।

2. आयकर समझौता आयोग द्वारा किए गए ‘समझौता’ का दायरा क्या है ?

आय़कर समझौता आयोग, जिन निर्धारण वर्षों के लिए आवेदक आयोग के समक्ष आया है, उनके कर विवाद के संबंध में कर की राशि एवं उस पर ब्याज निर्धारण का निर्णायक रूप से फैसला करता है । आयोग के पास आयकर अधिनियम 1961 के अधीन किसी शास्ति (जुर्माना) के अधिरोपण अथवा अभियोजन संबंधी कार्यवाही शुरु किए जाने से उन्मुक्ति प्रदान करने का भी अधिकार है। परंतु समझौता आवेदन फाईल किए जाने से पूर्व शुरू किए गए किसी अभियोजन संबंधी कार्यवाही से उन्मुक्ति उपलब्ध नहीं है। आयोग द्वारा प्रदान की गई उन्मुक्ति वापस ली जा सकती है यदि आयोग को बाद में यह पता चलता है कि आवेदक ने समझौते की कार्यवाहियों के दौरान महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया था अथवा मिथ्या साक्ष्य दिया था।

समझौता आयोग द्वारा पारित समझौता आदेश में समझौते  की शर्तें होंगी जिनमें कर, शास्ति (जुर्माना) या ब्याज के तौर पर कोई मांग एवं इन मांगों को किस प्रकार अदा किया जाना है,  इसका भी उल्लेख होगा। यह आदेश समझौते को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक दूसरे मामलों को भी संबोधित करेगा। समझौता आयोग द्वारा पारित निर्णायक समझौता आदेश उस विशिष्ट आवेदक के मामले ( केस) पर ही लागू होगा एवं उस मामले का विनिश्चय आधार दूसरे मामलों (केसों) एवं अन्य प्राधिकारियों के समक्ष की जाने वाली कार्यवाहियों पर लागू नहीं होगा।

3. क्या आयकर समझौता आयोग आयकर विभाग का हिस्सा है ?

नहीं । आयकर समझौता आयोग एक स्वतंत्र अर्ध न्यायायिक प्राधिकरण है। यह केवल प्रशासनिक मामलों के लिए राजस्व विभाग का संबद्ध कार्यालय है।

4. कर विवाद की किस अवस्था में मैं समझौता आयोग के समक्ष आ सकता हूँ ?

किसी विशिष्ट निर्धारण वर्ष के लिए कोई आवेदक आयकर समझौता आयोग के समक्ष तभी आ सकता है जब संबंधित आयकर प्राधिकारी द्वारा कोई निर्धारण आदेश पारित करने की वैधानिक समय सीमा समाप्त नहीं हुई है। कार्यवाहियाँ निर्धारण वर्ष के प्रथम दिन से ही लंबित मानी जाएंगी एवं आवेदन फाईल करने के लिए यह जरूरी नहीं है कि आय का रिटर्न फाईल किया गया हो अथवा संवीक्षा (स्क्रूटिनी) के लिए नोटिस जारी किया गया हो।

5. मैं समझौता आयोग  के समक्ष आने के लिए किस प्रकार पात्र बनता हूं ? क्या मुझे पहले ही कोई कर अदा करना होगा ?

समझौता आयोग के समक्ष आने के पूर्व जो पहली शर्त आपको पूरी करनी होगी वह यह है कि आपको अतिरिक्त आयकर प्रकट करना होगा जिसकी राशि कम से कम रू. 10 लाख हो । इसमें ऐसे आयकर पर प्रदेय ब्याज शामिल नहीं हैं। ऐसे मामले जिनमें तलाशी और अभिग्रहण निर्धारण कार्यवाहियां शामिल हैं, अतिरिक्त आयकर की जो राशि प्रकट करनी होगी वह कम से कम रू. 50 लाख है। आपके लिए यह भी जरूरी है कि आप अतिरिक्त आयकर और उसपर  देय ब्याज की पूरी रकम, समझौता आवेदन फाइल करने से पहले अदा कर दें एवं अदायगी का प्रमाण संलग्न करें।

दूसरी अनिवार्य शर्त यह है कि आपने 1 जून 2007 के बाद कोई ऐसा समझौता आवेदन फाइल नहीं किया है, जिसे कार्यवाही की अनुमति दे दी गई है।

तीसरी अनिवार्य शर्त यह है कि आप जिस निर्धारण वर्ष के लिए आयोग के समक्ष आ रहे है उसके लिए संबंधित आयकर प्राधिकारी द्वारा कोई निर्धारण आदेश  जारी नही  किया गया है एवं उस वर्ष के लिए निर्धारण आदेश पारित करने की वैधानिक समय सीमा समाप्त नहीं हुई है। निर्धारण आदेश उस दिन पारित हुआ माना जाएगा जिस दिन वह कर दाता को जारी किया गया है।

कुछ अन्य प्रक्रियात्मक शर्तें भी है जैसे कि निर्धारित शुल्क की अदायगी एवं संबंधित निर्धारण अधिकारी को उसी दिन निर्धारित फॉर्म संख्या 34 बी ए में सूचित करना।

6. मैं समझौते के लिए आवेदन किस प्रकार करूँ?

समझौता आवेदन केवल आयकर नियम 1962 के अधीन अधिसूचित, फॉर्म सं. 34-बी में की जानी है, जिसे आवेदक स्वयं हस्ताक्षरित करेगा। आवेदन व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत किया जा सकता है अथवा डाक द्वारा भेजा जा सकता है। आवेदन, आवेदक द्वारा स्वयं अथवा उसके प्राधिकृत प्रतिनिधि द्वारा किया जा सकता है। आवेदन, आयकर समझौता आयोग के संबंधित पीठ के सचिव को संबोधित करके निबंधित डाक द्वारा भी भेजा जा सकता है।

आवेदन के साथ, अतिरिक्त आयकर एवं धारा 234 बी तथा 234 सी के अधीन उस पर ब्याज की अदायगी के प्रमाण का होना आवश्यक है। अतिरिक्त कर पर ब्याज, आवेदन की मंजूरी के दिन तक प्रभार्य है।

आवेदन के साथ निर्धारित शुल्क की अदायगी का प्रमाण भी होना चाहिए। वर्तमान में यह शुल्क 500 रूपए नियत की गई है।

7. समझौता आवेदन कब नामंजूर किया जा सकता है ? नामंजूर किए जाने के क्या परिणाम है ?

समझौता आवेदन फाईल करने के बाद आयोग द्वारा धारा 245 डी (1) के अधीन कार्यवाही के दौरान, आवेदन फाइल करने की तारीख से 14 दिनों के भीतर आयोग द्वारा आवेदन नामंजूर किया जा सकता है।

यदि आवेदक उत्तर सं. 5 में दर्शाए गए तीन अनिवार्य शर्तों को पूरा नहीं करता है तो आयोग आवेदन नामंजूर कर सकता है। और भी, कोई आवेदन जिसके साथ अतिरिक्त कर एवं ब्याज की पूरी राशि एवं निर्धारित 500 रूपए के शुल्क की राशि के भुगतान का प्रमाण नहीं हो, भी नामंजूर किया जा सकता है। आवेदन की एक प्रति संबंधित आयकर प्राधिकारी को आवेदन की तारीख में भेजी जानी है, जिसके न होने पर इसे नामंजूर किया जा सकता है।

वह आवेदक, जिसका आवेदन धारा 245 डी (1) के अधीन नामंजूर कर दिया गया है, समझौते के लिए दूसरा आवेदन फाइल कर सकता है।

8. क्या मैं समझौता आवदेन फाइल करने के बाद वापस ले सकता हूँ?

नहीं । आवेदक समझौता आयोग के समक्ष आवेदन करने के बाद उसे वापस नहीं ले सकता है।

9. मेरी ओर से कौन आवेदन फाइल कर सकता है ?

i) आप निबंधित डाक द्वारा, संबंधित पीठ के सचिव को संबोधित करते हुए आवेदन कर सकते हैं।परंतु डाक द्वारा आवेदन किए जाने की स्थिति में आयोग में इसके प्राप्त किए जाने की तारीख को आवेदन की तारीख माना जाएगा।

ii) आपकी ओर से प्राधिकृत प्रतिनिधि भी वैयक्तिक रूप से आवेदन कर सकता है। प्राधिकृत प्रतिनिधि, से अभिप्राय ऐसे व्यक्ति से है, जिसे आपने वैयक्तिक रूप से, आपकी ओर से प्रस्तुत होने का प्राधिकार दिया है, एवं जो – ऐसा व्यक्ति जो आपका किसी प्रकार का नातेदार है,

अथवा ऐसा व्यक्ति जो आपके द्वारा नियमित रूप से नियोजित है।

किसी अनुसूचित बैंक का अधिकारी जिसमें आवेदक द्वारा चालू खाता का संधारण किया जा रहा हो या

अन्य नियमित लेनदेन होता हो, अथवा

कोई विधि व्यवसायी जो  भारत के किसी दीवानी (सिविल) न्यायालय में व्यवसाय करने का हकदार होः, अथवा

चार्टर्ड अकाउन्टेन्ट्स अधिनियम 1949 (1949 का 38) के अनुसार अकाडन्टेन्ट (लेखापाल) हो, एवं राज्यों के संदर्भ में, इसमें कंपनी अधिनियम (1956 का 1 ) की धारा 226 की उपधारा (2) के आधार पर ऐसा व्यक्ति जो उस राज्य मे कंपनियों के लेखापाल के रूप में नियुक्त किए जाने का हकदार हो।

बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त किसी लेखा परीक्षा को उत्तीर्ण किया हुआ व्यक्ति, अथवा बोर्ड द्वारा नियत शैक्षिक योग्यता को प्राप्त किया हुआ व्यक्ति।

10. मंजूरी की प्रक्रिया में कितना समय लगता है ?

आपके द्वारा फाइल किया गया आवेदन यदि आयोग द्वारा धारा 245 डी (1) के अधीन 14 दिनों के भीतर नामंजूर नहीं किया जाता है तो इसे स्वीकृत एवं आगे की कार्यवाही के लिए मंजूर कर लिया गया माना जाएगा। इसके बाद आयोग धारा 245 डी (2बी) के अधीन आयकर आयुक्त के रिपोर्ट की मांग करता है। आयोग धारा 245 डी (2सी) के अधीन आदेश पारित कर के आयुक्त की रिपोर्ट के आधार पर संतुष्ट होकर अथवा यदि आयोग द्वारा भेजे गए पत्र की प्राप्ति के 30 दिनों की अवधि के भीतर आयुक्त की रिपोर्ट प्राप्त नहीं होती है, तो धारा 245 डी (2सी) के अधीन आदेश जारी करके आवेदन को विधिमान्य घोषित कर सकता है। आयोग द्वारा आयुक्त को दिए गए 30 दिनों की अवधि की समाप्ति के 15 दिनों के भीतर आयोग  द्वारा आदेश पारित किया जाना है।

आयोग धारा 245 डी (1) के अधीन आवेदन नामंजूर करने अथवा धारा 245 डी (2सी) के अधीन अविधिमान्य घोषित करने से पूर्व आवेदक को सुनवाई का अवसर देगा।

11. समझौते की प्रक्रिया किस प्रकार प्रचालित होती है ? इसमें कितना समय लगता है ?

जब समझौता आवेदन को विधिमान्य घोषित कर दिया जाता है तो आयोग आवेदन के गोपनीय हिस्से को आयकर आयुक्त के साथ साझा करता है एवं नियम 9 के अधीन 45 दिनों के भीतर उसके रिपोर्टों की मांग करता है । इस  रिपोर्ट की एक प्रति आवेदक के साथ साझा की जाती है ताकि वह उसपर अपना प्रतयुत्तर दे सके। आयोग दोनों की बातों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न तारीखों में सुनवाई नियत करके, दोनों पक्षों  अर्थात् आयकर विभाग एवं आवेदक को सुने जाने का अवसर देता है। आयोग द्वारा धारा 245 डी (4) के अधीन अंतिम समझौता आदेश  आवेदन की तिथि से 18 महीने के भीतर पारित किया जाना आवश्यक है।

12. यदि समझौता आयोग 18 महीने के भीतर समझौता आदेश पारित नहीं करता है तो क्या होगा ?

यदि समझौता आयोग 18 महीने के भीतर समझौता आवेदन पारित नहीं कर पाता है तो केस संबंधित आयकर प्राधिकार के पास वापस चला जाता है।

13. मैं आवेदन फाईल करने के लिए अतिरिक्त कर की गणना  किस प्रकार करूं ?

यह इस बात पर निर्भर करेगा कि समझौता आवेदन केवल एक अथवा अधिक  ‘ पिछले वर्ष’ से संबंधित है एवं संबंधित पिछले वर्ष (वर्षों) में आय का कोई रिटर्न फाइल किया गया है अथवा नहीं।

जबकि आवेदन में प्रकट की गई आय केवल एक पिछले वर्ष से संबंधित है एवं आवेदक ने उस वर्ष के कुल आय के संबंध में रिटर्न फाइल नहीं किया है तो कर की गणना आवेदन में प्रकट की गई आय पर की जाएगी मानो कि ऐसी आय, कुल आय है।

जबकि आवेदन में प्रकट की गई आय केवल  एक ‘पिछले वर्ष’ से संबंधित है एवं आवेदक ने उस वर्ष की कुल आय का रिटर्न फाइल कर दिया है तो कर की गणना रिटर्न में दर्शायी गई कुल आय़ एवं आवेदन में प्रकट की गई आय के जोड़ पर की जाएगी मानो ऐसी सकल आय, कुल आय है। इसमें से रिटर्न में दर्शाए कुल आय पर कर की राशि घटा दी जाएगी। जो शेष बचेगा, वह कर की अतिरिक्त राशि होगा।

जहां आवेदन मे प्रकट की गई आय एक से अधिक पिछले वर्षों से संबंधित है, प्रत्येक वर्ष के लिए प्रकट किए गए आय पर अतिरिक्त कर की राशि की गणना (i) तथा (ii) में दी गई प्रणाली से की जाएगी।

14. मैं अतिरिक्त कर पर ब्याज की राशि की गणना कैसे करुँ

आयकर अधिनियम 1961 की धारा 234 बी एवं सी के अधीन ब्याज की गणना करने के लिए पहले उत्तर 13 के अनुसार अतिरिक्त कर की गणना कीजिए। फिर जांच कीजिए की आप धारा 208 के अधीन अग्रिम कर अदा करने के उतरदायी थे या नहीं, यदि आप उतरदायी थे तो धारा 234 बी के अधीन अग्रिम कर की अदायगी नहीं करने एवं धारा 234 सी के अधीन अग्रिम कर की अदायगी में विलंब करने के लिए लागू ब्याज की गणना, समझौता आवेदन में शामिल प्रत्येक वर्ष के लिए अलग- अलग करें।

1. धारा 234 बी के अधीन अग्रिम कर की अदायगी नहीं करने पर ब्याज की गणना प्रत्येक महीने अथवा महीने के हिस्से के लिए अतिरिक्त कर पर 1 प्रतिशत की दर से निर्धारण वर्ष के अप्रैल माह के प्रथम दिन से लेकर समझौता आवेदन फाइल करने की तारीख तक की अवधि के लिए की जाएगी।

2. धारा 234 सी के अधीन अग्रिम कर की अदायगी में विलंब के लिए देय ब्याज की गणना के लिए आपको निम्न अनुसूची के अनुसार अग्रिम कर की अदायगी में कमी का आकलन करना होगा –

(i) कंपनी के सभी कर दाताओं के लिए अग्रिम कर की अदायगी निम्न प्रकार से की जानी है –

15 जून को अथवा उससे पहले – वर्ष के अग्रिम कर का 15 प्रतिशत
15 जून से 15 सितम्बर के मध्य – वर्ष के अग्रिम कर का 45 प्रतिशत
15 सितम्बर से 15 दिसम्बर के मध्य – वर्ष के अग्रिम कर का 75 प्रतिशत
15 सितम्बर से 15 दिसम्बर के मध्य – वर्ष के अग्रिम कर का 75 प्रतिशत

(ii) कंपनी के अतिरिक्त अन्य सभी कर दाताओं के लिए अग्रिम कर की अदायगी निम्न प्रकार से की जानी है –

15 सितम्बर या उससे पूर्व – वर्ष के अग्रिम कर का 30 प्रतिशत
15 सितम्बर से 15 दिसम्बर के मध्य – वर्ष के अग्रिम कर का 60 प्रतिशत
15 दिसम्बर से 15 मार्च के मध्य –  वर्ष के अग्रिम कर का 100 प्रतिशत

15. जब में समझौता आवेदन फाइल कर देता हूं तो क्या मुझे संबंधित निर्धारण वर्षों के लिए आयकर विभाग के दिशानिर्देशों का अनुपालन करना पड़ेगा ?आयकर विभाग की अधिकारिता मेरे उपर जारी रहेगी अथवा नहीं ?

जब आप समझौता आयोग के समक्ष आवेदन फाइल कर देते हैं तो जिन वर्षों की निर्धारण कार्यवाही के लिए आपने आवेदन किया है, उन वर्षों के लिए आयकर अधिनियम एवं धन कर अधिनियम के प्रयोजन के लिए, अधिकारिता आयकर समझौता आयोग को हस्तांतरित हो जाती है।  पंरतु कभी –कभी आयकर समझौता आयोग किसी मामले में हाथ बंटाने के लिए आयकर आयुक्त को विशिष्ट अन्वेषणों के लिए प्राधिकृत करता है । यद्यपि आप यह जांचना चाहेंगे कि आयकर समझौता आयोग द्वारा आयुक्त को प्राधिकृत किया गया है अथवा नहीं।